इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) — क़ानूनी तरीक़े से कम टैक्स चुकाओ

बुधवार की दोपहर थी। मीरा ने बिष्ट जी के परचेज़ इनवॉइसेस ERPLite में एंटर करना अभी-अभी ख़त्म किया था। "शर्मा सर, बिष्ट जी ने इस महीने अपनी ख़रीदारी पर Rs 42,000 GST चुकाया। और बिक्री पर Rs 58,000 GST कलेक्ट किया। क्या उन्हें सच में Rs 58,000 सरकार को देने पड़ेंगे?" शर्मा सर मुस्कुराए। "नहीं मीरा। सिर्फ़ फ़र्क़ देना पड़ता है। Rs 58,000 माइनस Rs 42,000। यानी Rs 16,000। बाक़ी तो पहले ही चुक गया है। इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट — ITC कहते हैं। ये GST की जान है। और आज तुम इसे पूरी तरह समझोगी।"


ITC का मूल विचार

इनपुट टैक्स क्रेडिट, GST का सबसे ज़रूरी कॉन्सेप्ट है। अगर तुम ITC समझ गए, तो तुम समझ गए कि GST पुराने टैक्स सिस्टम से बेहतर क्यों है।

एक वाक्य में:

तुमने ख़रीदते वक़्त GST दिया। बेचते वक़्त GST वसूला। सरकार को सिर्फ़ फ़र्क़ देना है।

इसे फ़ॉर्मूला में लिखें:

चुकाना GST = बिक्री पर वसूला GST - ख़रीदारी पर दिया GST
            = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स क्रेडिट

बस। तुमने ख़रीदारी पर जो GST दिया, वो तुम्हारा इनपुट टैक्स क्रेडिट है। तुम इसे सरकार को देने वाले GST को कम करने के लिए इस्तेमाल करते हो।

इसे "इनपुट" टैक्स क्रेडिट क्यों कहते हैं?

बिज़नेस में:

  • इनपुट्स = जो तुम बिज़नेस चलाने के लिए ख़रीदते हो (कच्चा माल, रीसेल के लिए गुड्स, सेवाेस)
  • आउटपुट = जो तुम बेचते हो

तुम्हारे इनपुट्स (ख़रीदारी) पर लगा टैक्स तुम्हारा "इनपुट टैक्स" है। तुम्हें इसका "क्रेडिट" मिलता है — मतलब ये तुम्हारा टैक्स बिल कम करता है।

ऐसे सोचो: मान लो तुम चाय की दुकान पर हो। तुम दुकानदार को Rs 100 का नोट देते हो। चाय Rs 30 की है। वो तुम्हें Rs 70 वापस देता है बाक़ी के। ITC उसी बाक़ी जैसा है — तुमने कुछ GST पहले ही अपनी ख़रीदारी से चुका दिया, तो सरकार तुम्हारा फ़ाइनल टैक्स बिल कम करके "बाक़ी" वापस दे देती है।


चरण-बाय-चरण: ITC कैसे काम करता है

चलो असली नंबर्स के साथ बिष्ट जी के बिज़नेस में ITC ट्रेस करते हैं।

बिष्ट जी की जनवरी की ख़रीदारी (उन्होंने क्या ख़रीदा)

ख़रीदारीआपूर्तिकर्ताटैक्सेबल वैल्यूGST @ 5%कुल चुकाया
हल्दी (कच्ची) राजस्थान सेRajasthan Spice Co.Rs 2,00,000Rs 10,000 (IGST)Rs 2,10,000
मिर्च (कच्ची) आंध्र सेAP Mirchi TradersRs 1,50,000Rs 7,500 (IGST)Rs 1,57,500
जीरा गुजरात सेGujarat Seeds LtdRs 1,00,000Rs 5,000 (IGST)Rs 1,05,000
पैकेजिंग मटीरियल (लोकल)Haldwani PackagingRs 40,000Rs 7,200 (CGST 3,600 + SGST 3,600) @ 18%Rs 47,200
ट्रांसपोर्ट चार्जेसKumaon TransportRs 50,000Rs 2,500 (CGST 1,250 + SGST 1,250) @ 5%Rs 52,500
कुलRs 5,40,000Rs 32,200Rs 5,72,200

बिष्ट जी का कुल इनपुट टैक्स (ख़रीदारी पर दिया GST) = Rs 32,200

बिष्ट जी की जनवरी की बिक्री (उन्होंने क्या बेचा)

बिक्रीग्राहकराज्यटैक्सेबल वैल्यूGST @ 5%कुल मिला
Turmeric Powder देहरादून की दुकान कोMountain Spiceउत्तराखंडRs 3,00,000Rs 15,000 (CGST 7,500 + SGST 7,500)Rs 3,15,000
Chilli Powder दिल्ली के होलसेलर कोDelhi Masala Houseदिल्लीRs 2,00,000Rs 10,000 (IGST)Rs 2,10,000
जीरा नैनीताल की दुकान कोLake City Storeउत्तराखंडRs 1,50,000Rs 7,500 (CGST 3,750 + SGST 3,750)Rs 1,57,500
मिक्स्ड ऑर्डर लखनऊ कोUP GrocersUPRs 1,00,000Rs 5,000 (IGST)Rs 1,05,000
कुलRs 7,50,000Rs 37,500Rs 7,87,500

बिष्ट जी का कुल आउटपुट टैक्स (बिक्री पर वसूला GST) = Rs 37,500

ITC गणना

सरकार को चुकाना GST = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स क्रेडिट
                     = Rs 37,500 - Rs 32,200
                     = Rs 5,300

ITC के बिना, बिष्ट जी Rs 37,500 सरकार को चुकाते। ITC के साथ, वो सिर्फ़ Rs 5,300 चुकाते हैं। उन्होंने Rs 32,200 बचाए — क़ानूनी तरीक़े से! ये टैक्स चोरी नहीं है। सिस्टम ऐसे ही काम करने के लिए बना है।

ITC बिष्ट जी का सरकार को चुकाने वाला अमाउंट कम करता है


ITC कैसे सेट ऑफ़ होता है: CGST, SGST, IGST

ITC सिर्फ़ एक पूल नहीं है। तुम्हारा क्रेडिट टाइप (CGST, SGST, IGST) के हिसाब से बँटा होता है, और नियम हैं कि कौन सा क्रेडिट किस टैक्स के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है।

सेट-ऑफ़ के नियम

उपलब्ध ITCकिसके ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है
IGST क्रेडिटपहले IGST, फिर CGST, फिर SGST
CGST क्रेडिटपहले CGST, फिर IGST (SGST के ख़िलाफ़ नहीं)
SGST क्रेडिटपहले SGST, फिर IGST (CGST के ख़िलाफ़ नहीं)

याद रखने का मुख्य नियम: CGST क्रेडिट, SGST के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं हो सकता, और SGST क्रेडिट, CGST के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि CGST केंद्र का टैक्स है और SGST राज्य का टैक्स — ये सीधे एक-दूसरे में कन्वर्ट नहीं हो सकते।

बिष्ट जी का विस्तृत सेट-ऑफ़ (जनवरी)

पहले टाइप के हिसाब से ITC गणना करते हैं:

इनपुट टैक्स (ITC अर्न्ड):

टाइपराशिसोर्स
IGSTRs 22,500राजस्थान, AP, गुजरात से ख़रीदारी
CGSTRs 4,850हल्द्वानी के लोकल आपूर्तिकर्ता से ख़रीदारी
SGSTRs 4,850हल्द्वानी के लोकल आपूर्तिकर्ता से ख़रीदारी
कुल ITCRs 32,200

आउटपुट टैक्स (बिक्री पर वसूला टैक्स):

टाइपराशिसोर्स
IGSTRs 15,000दिल्ली, UP को बिक्री
CGSTRs 11,250उत्तराखंड के अंदर बिक्री
SGSTRs 11,250उत्तराखंड के अंदर बिक्री
कुल आउटपुटRs 37,500

चरण-बाय-चरण सेट-ऑफ़:

चरण 1: पहले IGST क्रेडिट इस्तेमाल करो (Rs 22,500)

  • IGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 15,000। बचा IGST क्रेडिट = Rs 7,500।
  • CGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 7,500। बचा IGST क्रेडिट = Rs 0।

चरण 2: CGST क्रेडिट इस्तेमाल करो (Rs 4,850)

  • बचे CGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 11,250 - Rs 7,500 = Rs 3,750। Rs 3,750 CGST क्रेडिट इस्तेमाल। बचा CGST क्रेडिट = Rs 1,100।
  • बचा CGST क्रेडिट (Rs 1,100) IGST के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो सकता है (लेकिन IGST पहले से ज़ीरो है)। तो Rs 1,100 कैरी फ़ॉरवर्ड होगा।

चरण 3: SGST क्रेडिट इस्तेमाल करो (Rs 4,850)

  • SGST आउटपुट के ख़िलाफ़: Rs 11,250। Rs 4,850 इस्तेमाल। बचा SGST आउटपुट = Rs 6,400।

चरण 4: बिष्ट जी असल में कितना कैश चुकाते हैं

टैक्सआउटपुटITC इस्तेमालकैश चुकाना
IGSTRs 15,000Rs 15,000 (IGST क्रेडिट से)Rs 0
CGSTRs 11,250Rs 7,500 (IGST) + Rs 3,750 (CGST) = Rs 11,250Rs 0
SGSTRs 11,250Rs 4,850 (SGST)Rs 6,400
कुलRs 37,500Rs 31,100Rs 6,400

बिष्ट जी Rs 6,400 कैश में चुकाते हैं। Rs 1,100 का CGST क्रेडिट अगले महीने के लिए कैरी फ़ॉरवर्ड होता है।

नोट: अगर सेट-ऑफ़ पेचीदा लग रहा है तो चिंता मत करो। ERPLite ये गणना अपने-आप करता है। लेकिन लॉजिक समझना ज़रूरी है ताकि तुम नंबर्स वेरिफ़ाई कर सको।


ITC क्लेम करने की शर्तें

किसी भी ख़रीदारी पर ITC क्लेम नहीं कर सकते। सख़्त शर्तें हैं। अगर एक भी शर्त पूरी नहीं हुई, तो ITC क्लेम ख़ारिज हो जाएगा।

पाँच शर्तें

शर्त 1: तुम्हारे पास वैलिड टैक्स इनवॉइस (या डेबिट नोट) होना चाहिए

इनवॉइस नहीं = ITC नहीं। इनवॉइस में सभी अनिवार्य फ़ील्ड्स होने चाहिए — आपूर्तिकर्ता GSTIN, HSN कोड, टैक्स ब्रेकअप, आदि। (ये हमने Chapter 18 में कवर किया।)

अगर बिष्ट जी किसी ऐसे किसान से मसाले ख़रीदते हैं जो GST रजिस्टर्ड नहीं है और GSTIN वाला इनवॉइस नहीं देता, तो बिष्ट जी उस ख़रीदारी पर ITC क्लेम नहीं कर सकते।

शर्त 2: तुम्हें गुड्स या सेवाेस असल में मिले होने चाहिए

जो गुड्स अभी रास्ते में हैं या डिलीवर नहीं हुए, उन पर ITC क्लेम नहीं कर सकते। गुड्स तुम्हारे (या तुम्हारे एजेंट के) कब्ज़े में होने चाहिए।

अगर बिष्ट जी 1,000 kg हल्दी ऑर्डर करते हैं और सिर्फ़ 800 kg पहुँचती है (200 kg रास्ते में खो गई), तो वो सिर्फ़ 800 kg पर ITC क्लेम कर सकते हैं जो असल में मिली।

शर्त 3: आपूर्तिकर्ता ने अपना GST रिटर्न फ़ाइल किया हो

ये बहुत ज़रूरी शर्त है। तुमने ख़रीदारी पर जो GST दिया, वो आपूर्तिकर्ता की GSTR-1 (सेल्स रिटर्न) में दिखना चाहिए। अगर आपूर्तिकर्ता तुमसे GST वसूलता है लेकिन अपना रिटर्न फ़ाइल नहीं करता, तो तुम्हारा ITC ख़त्म

इसीलिए शर्मा सर हमेशा क्लाइंट्स को कहते हैं: "रजिस्टर्ड, कम्प्लायंट आपूर्तिकर्ता से ख़रीदो।"

शर्त 4: तुमने ख़ुद अपना रिटर्न फ़ाइल किया हो

ITC तभी क्लेम कर सकते हो जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करते हो। अगर तुम रिटर्न फ़ाइल नहीं करते, क्रेडिट नहीं मिलता।

शर्त 5: 180 दिनों के अंदर पेमेंट करना ज़रूरी है

अगर तुमने इनवॉइस डेट से 180 दिनों के अंदर आपूर्तिकर्ता को पेमेंट नहीं किया, तो तुम्हें ITC रिवर्स (वापस) करना पड़ेगा। जब पे करोगे, तब फिर से क्लेम कर सकते हो।

मान लो बिष्ट जी जनवरी में AP Mirchi Traders से Rs 1,00,000 की मिर्च ख़रीदते हैं लेकिन अगस्त तक पे नहीं करते (180 दिन से ज़्यादा)। जिस महीने 180 दिन पूरे होंगे, उन्हें ITC रिवर्स करना पड़ेगा। जब फ़ाइनली पे करेंगे, तब रीक्लेम कर सकते हैं।

शर्तों का सारांश

शर्तइसका मतलबपूरी न होने पर क्या होगा
वैलिड टैक्स इनवॉइससही GST इनवॉइस होना चाहिएITC नहीं मिलेगा
गुड्स/सेवाेस मिलेतुम्हारे कब्ज़े में होने चाहिएसिर्फ़ जो मिला उस पर ITC
आपूर्तिकर्ता ने रिटर्न फ़ाइल कियाआपूर्तिकर्ता की GSTR-1 में इनवॉइस दिखना चाहिएमैच होने तक ITC ब्लॉक
तुमने रिटर्न फ़ाइल कियातुम्हें GSTR-3B फ़ाइल करनी होगीफ़ाइलिंग के बिना ITC नहीं
180 दिनों में पेमेंटआपूर्तिकर्ता को समय पर पे करोITC रिवर्स, पेमेंट पर रीक्लेम

ब्लॉक्ड क्रेडिट्स — जब ITC मिलता ही नहीं

अगर ऊपर की पाँचों शर्तें पूरी भी हों, तो कुछ ख़रीदारी पर ITC क़ानून से ब्लॉक है। तुम चाहे कुछ भी करो, ITC क्लेम नहीं कर सकते।

ब्लॉक्ड क्रेडिट्स की सूची (CGST Act की सेक्शन 17(5))

ब्लॉक्ड आइटमक्यों
मोटर व्हीकल्स (कार, बाइक)पर्सनल इस्तेमाल की संभावना; ट्रांसपोर्ट बिज़नेस के लिए एक्सेप्शन
खाना-पीना (फ़ूड ऐंड बेवरेजेस)जब तक फ़ूड/हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस में न हो
हेल्थ और फ़िटनेस सेवाेसजिम मेंबरशिप, हेल्थ क्लब
क्लब मेंबरशिप्ससोशल क्लब, स्पोर्ट्स क्लब
रेंट-ए-कैब सेवाेसजब तक ट्रांसपोर्ट कंपनी न हो
एम्प्लॉइज़ के ट्रैवल फ़ायदेलीव ट्रैवल, वेकेशंस
इम्मूवेबल संपत्ति का कंस्ट्रक्शनअपना दफ़्तर/शॉप बनाना (रियल एस्टेट डेवलपर नहीं)
पर्सनल इस्तेमाल की चीज़ेंकुछ भी जो पर्सनल कंज़म्पशन के लिए ख़रीदा, बिज़नेस के लिए नहीं
एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़ बनाने के लिए गुड्स/सेवाेसअगर आउटपुट एग्ज़ेम्प्ट है, तो इनपुट्स पर ITC नहीं
खोए, चुराए, ख़राब, या फ़्री सैंपल दिए गए गुड्सवेस्ट पर ITC नहीं
कंपोज़ीशन स्कीम के तहत दिया टैक्सकंपोज़ीशन डीलर्स को ITC बिल्कुल नहीं

बिष्ट जी के उदाहरण

  • बिष्ट जी Rs 8,00,000 की कार ख़रीदते हैं प्लस GST। ITC ब्लॉक्ड। कार पर GST क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि मोटर व्हीकल्स ब्लॉक्ड क्रेडिट्स हैं (जब तक कार गुड्स की ट्रांसपोर्टेशन के लिए न हो, जो सेडान नहीं है)।

  • बिष्ट जी क्लाइंट मीटिंग के लिए समोसे और चाय ऑर्डर करते हैं। लागत: Rs 2,000 प्लस GST। ITC ब्लॉक्ड। एम्प्लॉइज़/गेस्ट्स के लिए खाना-पीना ब्लॉक्ड क्रेडिट है।

  • बिष्ट जी Rs 3,00,000 की पैकेजिंग मशीन ख़रीदते हैं प्लस GST। ITC मिलेगा! बिज़नेस के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनरी ब्लॉक्ड लिस्ट में नहीं है। ये लेजिटिमेट बिज़नेस ख़र्चा है।

  • बिष्ट जी रीसेल के लिए हल्दी ख़रीदते हैं। ITC मिलेगा! रीसेल के लिए ख़रीदे गए गुड्स पूरी तरह ITC एलिजिबल हैं।


ITC रिवर्सल — कब ITC वापस करना पड़ता है

कभी-कभी तुम पहले ITC क्लेम करते हो लेकिन बाद में रिवर्स (वापस) करना पड़ता है। ये आम सिचुएशंस हैं:

सिचुएशन 1: 180 दिनों में पेमेंट नहीं

ये हम कवर कर चुके हैं। अगर 180 दिनों में आपूर्तिकर्ता को पे नहीं किया, ITC रिवर्स करो। पे करने पर रीक्लेम करो।

सिचुएशन 2: एग्ज़ेम्प्ट + टैक्सेबल दोनों सप्लाइज़ के लिए गुड्स इस्तेमाल

अगर बिष्ट जी कुछ इनपुट्स टैक्सेबल सप्लाइज़ (पैक्ड मसाले, 5% GST) और एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़ (बिना ब्रांड खुले मसाले, 0% GST) दोनों बनाने में इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें एग्ज़ेम्प्ट हिस्से के लिए ITC प्रोपोर्शनली रिवर्स करना पड़ता है।

जैसे: अगर उनकी 20% बिक्री एग्ज़ेम्प्ट है, तो उन्हें अपने आम ITC का लगभग 20% रिवर्स करना होगा।

सिचुएशन 3: आपूर्तिकर्ता से क्रेडिट नोट मिला

अगर आपूर्तिकर्ता क्रेडिट नोट जारी करता है (रिटर्न्स, छूट, आदि के लिए), तो बिष्ट जी का ITC भी उसी हिसाब से कम करना होगा।

सिचुएशन 4: इनपुट्स पर्सनल इस्तेमाल के लिए इस्तेमाल

अगर बिष्ट जी कुछ मसाले घर के लिए ले जाते हैं, तो उन मसालों पर ITC रिवर्स करना पड़ेगा। पर्सनल पर्पसेस के लिए इस्तेमाल किए गए बिज़नेस इनपुट्स ITC के लिए क्वालिफ़ाई नहीं करते।


मैचिंग कॉन्सेप्ट — GSTR-2A / GSTR-2B

"सरकार को कैसे पता चलता है कि मेरा ITC क्लेम वैलिड है?" मीरा ने पूछा।

शर्मा सर ने समझाया: "सरकार तुम्हारे क्लेम्स को तुम्हारे आपूर्तिकर्ता की फ़ाइलिंग्स से मैच करती है।"

ऐसे काम करता है:

  1. तुम्हारा आपूर्तिकर्ता GSTR-1 फ़ाइल करता है (अपनी बिक्री की ब्योरा)। तुम्हारे परचेज़ इनवॉइसेस उनके सेल्स डेटा में दिखते हैं।
  2. ये डेटा अपने-आप तुम्हारे GSTR-2A (डायनामिक, रियल-टाइम स्टेटमेंट) और GSTR-2B (स्टैटिक, मंथली स्टेटमेंट) में पॉपुलेट हो जाता है।
  3. जब तुम GSTR-3B फ़ाइल करके ITC क्लेम करते हो, सरकार चेक करती है: तुम्हारा ITC क्लेम GSTR-2B में जो दिखता है उससे मैच करता है?

अगर मिसमैच है — जैसे, तुम Supplier X से Rs 10,000 का ITC क्लेम करते हो, लेकिन Supplier X ने वो सेल अपनी GSTR-1 में कभी रिपोर्ट ही नहीं की — तो सरकार फ़्लैग करेगी।

GSTR-2A vs GSTR-2B

फ़ीचरGSTR-2AGSTR-2B
प्रकृतिडायनामिक (बदलता रहता है)स्टैटिक (हर महीने फ़िक्स)
कब अपडेट होता हैजब भी आपूर्तिकर्ता फ़ाइल/अमेंड करता हैअगले महीने की 14 तारीख़ को जेनरेट
किसके लिए इस्तेमालआपूर्तिकर्ता कम्प्लायंस चेक करने के लिएGSTR-3B में ITC क्लेम करने के लिए
ITC के लिए रिकमेंडनहीं (बदलता रहता है)हाँ (इसे रेफ़रेंस के रूप में इस्तेमाल करो)

अभ्यास में: GSTR-3B फ़ाइल करने से पहले, शर्मा सर हमेशा नेगी भैया से कहते हैं कि बिष्ट जी की GSTR-2B डाउनलोड करो और ERPLite के परचेज़ रजिस्टर से कंपेयर करो। कोई भी मिसमैच निवेशिगेट करनी चाहिए।

ITC मैचिंग प्रक्रिया — आपूर्तिकर्ता की GSTR-1 बायर की GSTR-2B में फ़ीड होती है


हैंड्स-ऑन: ERPLite में बिष्ट जी का मंथली ITC गणना करना

नेगी भैया ने मीरा को ERPLite में ITC चेक करना दिखाया।

चरण 1: GST रिपोर्ट खोलो

रिपोर्ट्स > GST रिपोर्ट्स > इनपुट टैक्स क्रेडिट समरी पर जाओ।

पीरियड चुनो: January 2026।

ERPLite एक समरी दिखाता है:

टैक्स टाइपउपलब्ध ITCसोर्स
IGSTRs 22,500इंटर-स्टेट ख़रीदारी
CGSTRs 4,850इंट्रा-स्टेट ख़रीदारी
SGSTRs 4,850इंट्रा-स्टेट ख़रीदारी
कुलRs 32,200

चरण 2: GSTR-2B से कंपेयर करो

GST पोर्टल से बिष्ट जी की GSTR-2B डाउनलोड करो। हर इनवॉइस कंपेयर करो:

आपूर्तिकर्ताइनवॉइस No.हमारे रिकॉर्डGSTR-2Bमैच?
Rajasthan Spice Co.RSC/456Rs 10,000Rs 10,000हाँ
AP Mirchi TradersAPM/789Rs 7,500Rs 7,500हाँ
Gujarat Seeds LtdGS/123Rs 5,000Rs 5,000हाँ
Haldwani PackagingHP/234Rs 7,200Rs 7,200हाँ
Kumaon TransportKT/567Rs 2,500Rs 2,500हाँ

सभी इनवॉइसेस मैच हुए! बिष्ट जी सेफ़ली Rs 32,200 ITC क्लेम कर सकते हैं।

चरण 3: ब्लॉक्ड क्रेडिट्स चेक करो

मीरा ने एक और परचेज़ एंट्री गौर की: "दफ़्तर लंच — Rs 1,200 + GST Rs 216।"

नेगी भैया बोले, "गुड कैच! खाना-पीना ब्लॉक्ड क्रेडिट है। ये Rs 216 हमें अपने ITC क्लेम में इन्क्लूड नहीं करना चाहिए। इसे ERPLite में 'ITC नॉट अवेलेबल' मार्क कर देता हूँ।"

ERPLite में, परचेज़ इनवॉइस एंटर करते वक़्त, हर लाइन आइटम के लिए एक विकल्प है:

  • ITC एलिजिबल: Yes / No

लंच ख़र्चा के लिए, इसे No सेट करो। ERPLite इसे ITC कैलकुलेशंस से बाहर रख देगा।

चरण 4: नेट पेएबल देखो

रिपोर्ट्स > GST रिपोर्ट्स > टैक्स लायबिलिटी समरी पर जाओ।

IGSTCGSTSGSTकुल
आउटपुट टैक्सRs 15,000Rs 11,250Rs 11,250Rs 37,500
इनपुट टैक्स क्रेडिटRs 22,500Rs 4,850Rs 4,850Rs 32,200
नेट पेएबल (सेट-ऑफ़ के बाद)Rs 0Rs 0Rs 6,400Rs 6,400
ITC कैरी फ़ॉरवर्डRs 0Rs 1,100Rs 0Rs 1,100

बिष्ट जी को इस महीने सरकार को Rs 6,400 कैश में चुकाने हैं। और Rs 1,100 का CGST क्रेडिट फ़रवरी में कैरी फ़ॉरवर्ड होगा।

ERPLite में ITC समरी जो नेट GST पेएबल दिखा रही है


क्विक रीकैप

  • ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) = ख़रीदारी पर चुकाया GST। बिक्री पर देने वाला GST कम करने के लिए इस्तेमाल होता है।
  • फ़ॉर्मूला: चुकाना GST = आउटपुट टैक्स - इनपुट टैक्स क्रेडिट
  • IGST क्रेडिट पहले IGST, फिर CGST, फिर SGST के ख़िलाफ़ सेट ऑफ़ होता है। CGST और SGST क्रेडिट्स एक-दूसरे में कन्वर्ट नहीं हो सकते।
  • ITC क्लेम करने की पाँच शर्तें: वैलिड इनवॉइस, गुड्स मिले, आपूर्तिकर्ता ने रिटर्न फ़ाइल किया, तुमने रिटर्न फ़ाइल किया, 180 दिनों में पेमेंट।
  • ब्लॉक्ड क्रेडिट्स: मोटर व्हीकल्स, खाना-पीना, पर्सनल आइटम्स, क्लब मेंबरशिप्स, कंस्ट्रक्शन, आदि।
  • ITC रिवर्सल तब होता है जब: 180 दिनों में पेमेंट नहीं, एग्ज़ेम्प्ट सप्लाइज़ के लिए गुड्स इस्तेमाल, क्रेडिट नोट मिला, या पर्सनल इस्तेमाल।
  • GSTR-2B ITC क्लेम्स का रेफ़रेंस डॉक्यूमेंट है। फ़ाइलिंग से पहले हमेशा रीकॉन्साइल करो।
  • ERPLite में, ब्लॉक्ड क्रेडिट आइटम्स को "ITC नॉट अवेलेबल" मार्क करो ताकि ITC कैलकुलेशंस से बाहर रहें।

अभ्यास अभ्यास

अभ्यास 1: ITC गणना करो

बिष्ट जी की फ़रवरी की ख़रीदारी:

ख़रीदारीचुकाया GST
राजस्थान से हल्दीRs 8,000 (IGST)
आंध्र प्रदेश से मिर्चRs 6,000 (IGST)
हल्द्वानी से पैकेजिंगRs 3,600 (CGST Rs 1,800 + SGST Rs 1,800)
दफ़्तर के लिए नया कंप्यूटरRs 14,400 (CGST Rs 7,200 + SGST Rs 7,200)
स्टाफ़ मीटिंग का लंचRs 540 (CGST Rs 270 + SGST Rs 270)

फ़रवरी की बिक्री पर आउटपुट टैक्स:

टैक्स टाइपराशि
IGSTRs 12,000
CGSTRs 9,000
SGSTRs 9,000

जनवरी से कैरी-फ़ॉरवर्ड: CGST Rs 1,100।

सवाल:

  1. कुल एलिजिबल ITC कितना है? (ब्लॉक्ड क्रेडिट्स याद रखो!)
  2. हर टैक्स टाइप (IGST, CGST, SGST) का नेट पेएबल गणना करो।
  3. क्या कोई ITC मार्च में कैरी फ़ॉरवर्ड होगा?

अभ्यास 2: ब्लॉक्ड या अलाउड?

नीचे की हर ख़रीदारी के लिए लिखो कि ITC ALLOWED है या BLOCKED:

  1. मसाले डिलीवर करने के लिए एक डिलीवरी वैन
  2. दफ़्तर स्टाफ़ के लिए चाय-नाश्ता
  3. अकाउंटेंट के लिए एक लैपटॉप
  4. नए वेयरहाउस का कंस्ट्रक्शन
  5. रीसेल के लिए कच्चे मसाले
  6. दफ़्तर के लिए प्रिंटर कार्ट्रिजेस
  7. बिष्ट जी के लिए जिम मेंबरशिप
  8. ग्राहकों को गुड्स भेजने के कूरियर चार्जेस

अभ्यास 3: ITC रिवर्सल

बिष्ट जी ने सितंबर में Gujarat Seeds Ltd से Rs 2,00,000 का जीरा ख़रीदा। GST चुकाया: Rs 10,000। ITC सितंबर में क्लेम किया।

  • मार्च में (180+ दिन बाद), उन्होंने अभी तक Gujarat Seeds Ltd को पे नहीं किया।
  • उन्हें ITC के साथ क्या करना चाहिए?
  • अगर अप्रैल में पे करते हैं, तो क्या होगा?

अभ्यास 4: GSTR-2B मिसमैच

फ़रवरी की GSTR-2B रीकॉन्साइल करते वक़्त, मीरा को पता चलता है कि एक आपूर्तिकर्ता (Haldwani Packaging, इनवॉइस HP/290, GST Rs 3,600) GSTR-2B में दिख ही नहीं रहा। उसे क्या करना चाहिए? कम से कम 3 चरण बताओ।


फ़न फ़ैक्ट

ITC सिर्फ़ भारत में नहीं है। ज़्यादातर देश जिनमें VAT (वैल्यू ऐडेड टैक्स) सिस्टम है, उनमें इससे मिलता-जुलता कॉन्सेप्ट है। यूरोपियन यूनियन में इसे "VAT डिडक्शन" कहते हैं। ऑस्ट्रेलिया में इसे "GST क्रेडिट" कहते हैं। आइडिया हर जगह एक ही है — बिज़नेसेस को सिर्फ़ उस वैल्यू पर टैक्स देना चाहिए जो उन्होंने ऐड की, उस पर नहीं जिस पर पहले से टैक्स लग चुका है। ये कॉन्सेप्ट सबसे पहले एक फ़्रेंच टैक्स ऑफ़िशियल Maurice Laure ने 1954 में पेश किया था। तो अगली बार जब तुम बिष्ट जी के लिए ITC गणना करो, याद रखना — तुम एक ऐसा आइडिया इस्तेमाल कर रहे हो जो एक फ़्रेंचमैन ने 70 साल से ज़्यादा पहले ईजाद किया था!